Lyrics Kuni Jal/Jaal Ka Sangal Ka (कुणी जाल का सांगाल का)

गीत : कवी अनिल
संगीत : यशवंत देव
गायक : डॉ. वसंतराव देशपांडे

कुणी जाल का सांगाल का
सुचवाल का त्या कोकिळा …(२)
रात्री तरी गाऊ नको …(२)
खुलावु नको अपुला गळा || ध्रु ||

आधीच संध्याकाळची …(२)
बरसात आहे लांबली
परत जाता चिम्ब चुम्बन …(२)
देत करे थांबली
भार पुर्वीचा दिला
तो श्वास चाहुन वाळला . …(२)
आत्ताच आभाळातला …(२)
काळोख मी कुरवाळीला || १ ||
कुणी जाल का सांगाल का



English Version :

Lyricist : Kavi Anil
Music Director : Yashavant Dev
Singer : Dr. Vasantarao Deshpande

Kuni jaal ka sangal ka
Suchawal ka tya kokila …(2)
Ratri tari gau nako …(2)
Khulawu nako apula gala ||

Adhich sandhyakalachi …(2)
Barasat aahe lambali
Parat jata chimb chumban …(2)
Det kare thambali
Bhar purvicha dila
To shwas chahun walala. …(2)
Attach abhalatala …(2)
Kalokh mi kurawalila || 1 ||
Kuni jaal ka sangal ka

1 Response to "Lyrics Kuni Jal/Jaal Ka Sangal Ka (कुणी जाल का सांगाल का)"

  1. Anonymous says:

    दुसरे कडवे

    सांभाळुनी माझ्या जीवाला, मी जरासे घेतले
    इतक्यात येता वाजली, हलकी निजेची पाऊले
    सांगाल का त्या कोकिळा, कि झाड होती वाढली
    आणि द्याया दाद कोणी, रात्र जागून काढली

Post a Comment

मूळ पान (Home Page) लाभले अम्हास भाग्य बोलतो मराठी । जाहलो खरेच धन्य ऐकतो मराठी ॥ धर्म, पंथ, जात एक जाणतो मराठी । एवढ्या जगात माय मानतो मराठी ॥
powered by Blogger | WordPress by Newwpthemes | Converted by BloggerTheme